Follow us on:
Showing posts with label रास्ते की Recipes. Show all posts
Showing posts with label रास्ते की Recipes. Show all posts

अनारी दाल पकवान


कभी कभी खासकर जब हम सफ़र में होते है रोड साइड स्ट्रीट फ़ूड देख कर हमारा मन भी कुछ करारा सा खाने का करता है तो आज उसी बात को ध्यान में रखते हुए  बनाते है कुछ ऐसा जो करारा भी हो,और हेल्थी होने के साथ चलते फिरते बनाया जा सके।  


बनाने की विधि -

सामग्री-

मैदा-१२० ग्राम 

अजवाइन-२ ग्राम 

घी-३ चम्मच 

तेल -तलने  के लिए 

 मूंग दाल -१००  ग्राम 

हल्दी-१० ग्राम 

प्याज़-२ न. 

टमाटर-२ न. 

नीबू-४ न. 

हरी मिर्च-७-८ न. 

अदरक १० ग्राम 

हरा धनिया -१५ ग्राम 

गुड़-५० ग्राम 

इमली-५० ग्राम 

काला नमक 

नमक 

अनार-१ न. 


मैदा में अजवाइन और घी डालने के बाद थोड़ा सा नमक डाल कर थोड़ा थोड़ा पानी डालते हुए सख्त सा गूँथ लेते है। कपडे से ढककर २०-२५ मिनट के लिए छोड़ देते है। 

मैदा की छोटी या बड़ी जैसी भी मर्जी करारी सी पूरी बना लेते है। याद रखना है पूरिया फुले नहीं इसके लिया इनमे तलने से पहले ही फोर्क की सहायता से छेद कर ले।


मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर गरम पानी में ३-४ घंटे के लिए भिगो दें ताकि वो पानी पीकर  नरम  हो जाये। 

अब दाल को हल्दी और थोड़ा सा नमक पानी में  डाल कर उबाल लेते है पर इतना ही की वो बस पक कर सॉफ्ट हो जाये मैश नहीं करना है। 

[

इमली और गुड़ को थोड़े पानी के साथ पका लेते है छानकर थोड़ा सा काला नमक मिला कर इस चटनी को भी रख लेते है।


प्याज़,टमाटर,हरी मिर्च,अदरक,हरा धनिया सभी को बारीक़ काट लेते है। 

पुरिया (पकवान ) तैयार है दाल और सब्ज़ियों का मसाला भी ,बस अब अरेंज ही तो करना है। 


जब भी खाने का मन करे तब-उबली दाल,कटी सब्ज़िया,नीबू,नमक,इमली चटनी मिलाकर मसाला सा बना ले। 

इस मसाले को पूरी के ऊपर रखे और थोड़े अनार के दाने और आनंद ले इस चलती फिरती चाट का। 

 


कढ़ाई पनीर पत्तगोभी रोल


कढ़ाई पनीर हम में से ज़्यदातर लोगो  की पसंददीदा सब्ज़ी होती है। यदि हम इसको रोटी  के साथ न खाकर किसी हरी सब्ज़ी के साथ खाये तो कैसा रहे ?

तो चलो आज कढ़ाई पनीर को पत्ता गोभी में भरकर बनाते है। 


बनाने की विधि -

सामग्री -

 पत्तागोभी -१ न. (बड़ा साइज़ )

पनीर -१२० ग्राम 

शिमला मिर्च -१ न. 

प्याज़ -१ न. 

टमाटर -२ न. 

हरा धनिया -२० ग्राम 

अदरक -५ ग्राम 

सरसो का तेल -३ चम्मच 

धनिया दाना -७ ग्राम 

साबुत  लाल मिर्च -१ न. 

हल्दी -४ ग्राम 

कश्मीरी मिर्च पाउडर -७ ग्राम 

धनिया पाउडर -५ ग्राम 

गरम मसाला -४ ग्राम 

नमक 

सिल्वर फॉयल 


पत्ता गोभी को डंठल वाली साइड से काटने के बाद उसके पत्ते निकल लेते है। 

पत्तो को उबलते पानी में थोड़ी देर डालने के बाद ठन्डे पानी में डाल कर छोड़ देते है। 

थोड़ी देर बाद पत्तो को पानी से निकाल कर छान देते है। 


पनीर को बारीक़ क्यूब में काट लेते है। 

इसी साइज में प्याज़,टमाटर,शिमला मिर्च को भी काट लेते है। 

अदरक और धनिया को बारीक़ चोप क़र  लेते है। 


पैन में तेल गरम  करके साबुत  लाल मिर्च और धनिया दाना को बेलन से क्रश करके डाल देते है। 

अब कटी हुई प्याज़,शिमला,टमाटर,अदरक  को डाल कर थोड़ी देर भुनने के बाद पनीर भी डाल देते है। 

अब हल्दी पाउडर,कश्मीरी मिर्च,धनिया पाउडर भी डाल क़र थोड़ी देर धीमी आंच पर भुनने के बाद नमक और गरम मसाला भी डाल देते है। अब कटा हुआ धनिया भी मिला देते है। 

गैस बंद करके थोड़ी देर ठंडा होने के लिए छोड़ देते है। 


अब पत्ता गोभी के पत्तो को बिछाकर इस पनीर की सब्ज़ी को उसके ऊपर डाल कर रोल क़र  लेते है।  

बहार से सिल्वर फॉयल में लपेट कर फ्रीज़र में  भी रख सकते है। 

इसको पैन में गरम करके,स्टीम करके या माइक्रोवेव में भी गरम करके जब मर्जी खाया जा सकता है। 

[

दाल चावल के क़बाब


हमारे देश में सबसे ज़्यादा लोगो द्वारा खाया जाने वाला किया जाने वाला खाना -दाल चावल ही है। 

रात में यदि खाना खाने के बाद आपके पास दाल और चावल बच जाये तो आप इस रेसिपी को बनाया  सकता है।

[

बनाने की विधि -

सामग्री-

 बचे हुए -

दाल १ बाउल   

चावल १/२ बाउल 

 

मूंग दाल -८०  ग्राम 

आलू (उबले हुए )

बेसन ५० ग्राम 

ब्रैड क्रम ५० ग्राम 

हरी मिर्च २ न. 

अदरक १० ग्राम 

गरम मसाला ५ ग्राम 

नमक 

तेल -तलने  के लिए 


मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर गरम पानी में ३-४ घंटे के लिए भिगो दे  ताकि वो सोफ्ट हो जाये। 

बची हुई दाल को किसी छननी में डाल क़र पानी निकलने के लिए रख दे या कपडे में दबा क़र भी पानी को निकल सकते है। 

मिर्च और अदरक को बारीक़ काट लेते है। आलू को मैश क़र ले। 

एक बाउल में छनी हुई दाल और उबले हुए चावल (थोड़े बचा लेते है ) आलू,बेसन,ब्रेड क्रम,मिर्च,अदरक,गरम मसाला स्वादानुसार नमक डाल क़र मिला ले। 

मिक्सर की छोटी छोटी बॉल बना लेते है। 

भीगी हुई मूंग दाल को छान लेते है और बचे हुए चावल के साथ मिला लेते है। 

अब इन बॉल्स को इस दाल चावल के ऊपर रोल करते हुए एक कोटिंग बना लेते है। 

अब दोनों हथेलियों से दबाकर टिक्की की तरह बना लेते है। 

अब टिक्कियों को तेल गरम करके फ्राई लेते है 

कबाब तैयार है अपनी मनपसंद सॉस के साथ खाये। 


पालक और पोहे के पकौड़े


सब्ज़ियों के पकोड़े तो हम अक्सर खाते  ही रहते है आज  कुछ नया बनाते है जो बनने में भी आसान हो साथ ही साथ पौष्टिक और स्वादिस्ट भी हो। 


पालक -हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में पालक प्रमुख है। यह शरीर में लोह तत्व की कमी को पूरा करता है विशेषरूप से महिलाओ के लिए पालक बहुत ही फायदेमंद है। 

महिलाओ में लोह तत्व की कमी अधिक होती है और उन्हें इसकी ज़्यादा जरूरत होती है। इसके अलावा यह शरीर में विटामिन ए,कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों की कमी को भी पूरा करता है। 

 

पोहा बहुत ही जल्दी तैयार होने वाला पौष्टिक खाना है। यह एक हल्का आहार है और इसी कारण शरीर द्वारा आसानी से पचाया जा सकता है इसलिए पोहा का सेवन पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा रहता है। 

पोहा में आयरन की मात्रा काफी होती है जिसके कारण शरीर में आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है। 

आयरन शरीर के लिए बहुत ही जरूरी मिनरल है जो हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। पोहा कार्बोहाइड्रेट के साथ साथ फाइबर का भी अच्छा स्रोत होता है।

 

बेसन -जैसा की हमको पता है,बेसन चना दाल का आटा है और चना प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर को भरपूर ताकत देता है।  यह एक अत्यधिक पोषक आहार है।

यह विटामिन थायमिन का एक अच्छा स्रोत है जो भोजन को शरीर में  ऊर्जा परिवर्तित करने में मदद करता है। 

इसमें विटामिन बी ६ पाया जाता है जो न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन के संश्लेषण में एक महत्वपूर्ण घटक है जिससे भूख और मूड दोनों ही ठीक रहते है। 

बेसन रक्तचाप को ठीक करने में भी सहायक है क्योंकि इसमें स्वाभाविक  रूप से सोडियम की मात्रा काफी होती है। 


बनाने  की विधि 

सामग्री 

 

 

पालक 250 ग्राम 

पोहा २५० ग्राम  

मूंगफली  ५० ग्राम 

बेसन १०० ग्राम 

अजवाइन १० ग्राम 

सरसो दाना ८ ग्राम 

करी पत्ता ५ न. 

प्याज़ ५० ग्राम 

हरी मिर्च २ न. 

सैंधा नमक 

काला नमक 

तेल-तलने के लिए

पालक को अच्छी तरह धोकर लम्बा लम्बा काट ले और  प्याज़ को भी। 

हरी मिर्च को बारीक़ काट ले। 

पोहा को धोकर छान ले। 

मूमफली को बेलन  की साहयता से बारीक़ (क्रश) कर ले। 

बेसन में अजवाइन डालकर घोल बना ले। 

पैन को गरम करके थोड़े से तेल में सरसों दाना और करी पत्ता डालने के बाद पोहा और हरी मिर्च डाल क़र धीमी आंच पर थोड़ी देर भून ले। 

बेसन के घोल में पालक,प्याज़,सैंधा और काला नमक़ और भुना हुआ पोहा डाल क़र मिला ले। 

तलने के लिए तेल गरम करे और छोटी छोटी मात्रा तेल में डाल कर पकौड़े तल ले। 

एक बार तेल से निकाल कर दोबारा करारे होने तक फ्राई करें। 

अपनी मनपसंद सॉस के साथ गरमागरम खाए। 

 


आओ बनाए -साबूदाना और शकरकंदी के बोंडे


साबूदाना का नाम सुनते ही दिमाग में सफ़ेद रंग के बीज या मोती जैसे खाद्य पदार्थ की तस्वीर उभरकर आती है। अक्सर व्रत और उपवास में सामान्य भोजन का त्याग कर दिया जाता है और इसके स्थान पर साबूदाने के पकवानो का सेवन किया जाता है। व्रत के अलावा भी साबूदाने का उपयोग कई व्यंजनों में किया जाता है। 

शकरकंदी- शकरकंदी में आयरन,मैग्निसियम,कार्बोहैड्रेट, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स,फास्फोरस, विटामिन सी, बीटा कैरोटीन और ज़िंक पाए जाते है। 

शकरकंदी मधुमेह में भी खाया जाना वाली सब्ज़ी है।


बनाने की  विधि 

सामग्री :

शकरकंदी ५०० ग्राम 

साबूदाना ८० ग्राम 

बेसन (कुटु का आटा ) १ कप 

हरी मिर्च २ न. 

अदरक २० ग्राम

करीपत्ता ५ ग्राम

सरसोदाना ५ ग्राम

सरसो का तेल १५ मिली 

सैंधानमक

तेल -तलने के लिए 


 

सबसे पहले शकरकंदी को उबाल क़र छील ले और छोटे छोटे टुकड़ो में काट ले। 

साबूदाने को एक दो बार धोकर पानी में ही भिगोकर रख दे। 

हरी मिर्च और अदरक को बारीक़ काट ले। 

कढ़ाई में तेल गरम करे और सरसो और करीपत्ता को डाल दे। 

तड़कने के बाद साबूदाने को पानी से छानकर डालें और अच्छी तरह भून ले अब कटी हुई शकरकंदी और हरी मिर्च को भी डाल दे साथ में अदरक को भी। 

स्वादानुसार नमक डाले और थोड़ी देर और भून ले। 

अब थोड़ा  मिलाकर छोटे छोटे पेड़े (बॉल्स ) बाना ले। 

बेसन में थोड़ा सा नमक डाल क़र एक  घोल बना ले। 

अब इन बॉल्स को घोल में डुबाए और फ्राई करे। 

थोड़ी देर के लिए फ्राई करने के बाद निकल ले और पुनः जब खाना  फ्राई करे। 

अपनी मनपसंद चटनी के साथ खाये। 

 


जड़ीबूटी (Herbs) वाले आलू (Potato) के टुकड़े(Wedge)


जड़ीबूटियों का हमारे दैनिक जीवन में विशेष महत्व है क्योंकि ये हमारे स्वास्थ्य को अच्छा रखने में बहुत  ज़्यादा सहायक है। इसके साथ साथ ये हमारे खाने के स्वाद को भी विकसित करती है।

हरा धनिया-धनिया डाइट्री फाइबर्स का  एक प्रमुख सोर्स है. इसके अलावा इसमें मैगनीज, आयरन, मैग्न‍िशियम भी भरपूर मात्रा में होता है. ये विटामिन सी, विटामिन के और प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स है. इसमें थोड़ी  मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, थायमिन और कैरोटीन भी पाया जाता है.

ये स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले कोलेस्ट्रॉल को कम करने और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है.

पाचन तंत्र के लिए भी ये विशेष रूप से अच्छा  है, ये लीवर की सक्रियता को बढ़ाने में मदद करता है.

डायबिटीज के मरीजों के लिए भी ये काफी फायदेमंद होता है. ये ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने का काम करता है.

धनिया एक शक्तिशाली प्राकृतिक सफाई करने वाला है। शरीर से भारी धातुओं और जहरीले तत्वों को साफ करने के लिए इसका प्रभावी ढंग से उपयोग होता है।  धनिये का प्रयोग एलर्जी,मूत्राशय की जलन और त्वचा से सम्बंधित एलर्जी की सूजन का इलाज करने के लिए किया जाता है। इससे जीवन शक्ति में सुधार होता है और दर्द घट जाता है। लौहतत्व और विटामिन ए, बी और सी से भरपूर,इसका भोजन में इस्तेमाल होने पर यह पौष्टिक मूल्य बढ़ता है। भोजन की पाचन शक्ति बढ़ जाती है और भूख काम हो सकती है। 

तुलसी - तुलसी एक बहुत ही गुणकारी औषधि है,शायद अपने इन्ही गुणों कारण के तुलसी का इतना ज़्यादा पौराणिक महत्व है,ज्यादातर हिन्दू परिवारों में तुलसी की पूजा की जाती है ऐसे सुख और कल्याण के तौर पर देखा जाता है। इसका प्रयोग कई बीमारियों में है यह सर्दी खांसी से लेकर कई बड़ी बीमारियों में कारगर औषधि है। 

आयुर्वेद में भी तुलसी को स्वास्थ्य के  लिहाज से बहुत फायदेमंद बताया गया गया है। 

आमतौर पर घरो में दो तरह की तुलसी देखने को मिलती है। एक जिसकी पत्तियों का रंग थोड़ा हल्का लाल सा  होता है और दूसरा जिसकी पत्तियों का रंग हरा होता है।

पुदीना-पुदीने को गुणों की खान माना जाता है. साधारण-सा दिखने वाला ये पौधा बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी प्रभाव रखता है. पुदीने की पत्ती में कई औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं. 

इसका एंटी-बैक्टीरियल गुण भी इसके फायदों में इजाफा करने का काम करता है।बदलते मौसम की वजह से त्वचा का रूखा होना स्वाभाविक है. इस रूखेपन से बचने के लिए रोज के खाने में पुदीना शामिल करें।  इससे भरपूर एंटीऑक्सीडेंट मिलेगा और त्वचा का निखार बरकरार रहेगा । 

पुदीने में पोटैशियम, मैग्नेशियम,कैल्शियम, फॉस्फोरस,विटामिन ए , सी,आयरन की मौजूदगी शरीर के लिए लाभकारी बनाता है। 

पुदीने में मौजूद मेंथोल माइग्रेन के सिरदर्द  को कम करने में मदद कर सकती है। यह संवेदनशीलता, मतली और जी मचलने के लक्षणों को भी कम कर सकता है। 

पुदीने की पत्ती पेट की मरोड़, पेचिश और खट्टी डकारों में भी लाभकारी हो सकती हैं। इससे मोशन की समस्या ठीक हो जाती है और पेट भी साफ रहता है।

पुदीने में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण सर्दी-जुकाम और साइनस से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में सहायक है। मेंथोल की वजह से आप को महसूस होगा की आप आसानी से सांस ले पा रहे हैं।

कुछ स्टडीज द्वारा पता चलता है कि पुदीना भूख  को कम कर देता है, जिसके कारण आप कम खाएंगे और आपका वजन भी नहीं बढ़ेगा।


बनाने की विधि 

सामग्री -

 

आलू  १ कि ग्राम 

हरा धनिया १०० ग्राम

तुलसी ५० ग्राम

पुदीना ३० ग्राम

हरी मिर्च ५ न. 

अदरक ५० ग्राम

भुना चना पाउडर १०० ग्राम 

कोर्नफ्लौर ८० ग्राम   

ओरगेनो (dry) १० ग्राम

मोटी कुटी मिर्च (chiili flaks ) १५ ग्राम 

सैंधा नमक 

तेल -तलने लिए 


आलुओ को अच्छी तरह धोकर लबाई में काट ले। 

नमक के पानी में डुबो कर २०-२५ मिनट तक छोड़ दे। 

भुना चना पाउडर,हरा धनिया,पुदीना,तुलसी,हरी मिर्च,अदरक को मिक्सर में डाल कर पीस ले। 

कटे हुए आलुओ को पानी से निकल ले और ये पीसा हुआ मसाला और कॉर्नफ्लोर,ओरगेनो,कुटी मिर्च और नमक को मिला दे और थोड़ा थोड़ा पानी भी  मिलाते रहे जिससे आलू के टुकड़ो पर एक परत सी आ जाए। 

मध्यम गरम तेल में इन आलुओ को तल ले। 

करारे आलू तैयार है।


शकरकंदी का सैंडविच -स्वादिष्ट और बनाने में बेहद आसान


घर से निकलते हुए कई बार हम सैंडविच पैक कर के ले जाते है जोकि खाने में आसान और फ़िलिंग होता है। 

तो आज हम बनाते है कुछ अलग तरह का  हेल्दी,टेस्टी और विभिन्न फ्लेवर से भरा हुआ सैंडविच।


शकरकंदी- शकरकंदी में आयरन,मैग्निसियम,कार्बोहैड्रेट, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स,फास्फोरस, विटामिन सी, बीटा कैरोटीन और ज़िंक पाए जाते है। 

शकरकंदी मधुमेह में भी खाया जाना वाली सब्ज़ी है।


बनाने की विधि 

सामग्री -

 

ब्राउन ब्रेड्स (जंबो )-४ स्लाइस 

शकरकंदी (sweet potato) ३०० ग्राम 

प्याज़ ५० ग्राम 

मटर दाना ५० ग्राम 

करी पत्ता १० ग्राम 

हरी मिर्च २ न. 

राई ५ ग्राम

हल्दी ५ ग्राम 

मद्रास करी पाउडर १० ग्राम 

मक्खन २० ग्राम 

सरसो का तेल १० ग्राम 

सैंधा नमक 

शकरकंदी को उबालकर ठंडा करके छील ले और छोटे छोटे टुकड़ो में काट ले। 

हरी मटर को भी अच्छी तरह उबाल कर छान कर रख ले। 

प्याज़ को मोटा मोटा और हरी मिर्च को बारीक़ काट ले।

पैन में सरसो का तेल गरम करे राई डाले करी पत्ता डाले इसके बाद प्याज़ डाल कर थोड़ी देर पकने के बाद शकरकंदी और मटर डाले और पकाये अब हल्दी और करी पाउडर डालें स्वादानुसार नमक डालकर,मैश होने तक पकाये ( पैन के तले को अच्छी तरह खुरचते रहे )

सैंडविच की फिलिंग तैयार है। 

ब्रेड को मक्खन लगाकर तवे पर सेक ले। 

अब सारी ब्रेड्स पर फिलिंग फैला ले और एक ब्रेड को दूसरे के ऊपर चिपका दे। 

पुनः तवा पर मक्खन लगाकर सैंडविच को करारा होने तक सेके। 

अब इसको दो भागो में काट ले। 

सैंडविच तैयार है। 


हरे पत्तो की रोटियां -हेल्दी और बनाने में भी आसान


हरी पत्तीदार शाक सब्ज़ियाँ शरीर के उचित विकास एवं अच्छे स्वास्थ के लिए आवश्यक होती है,क्योंकि इनमे सभी जरूरी पोषक तत्व उपस्थित होते है। 

पत्तेदार सब्ज़ियों में कैल्सियम,बीटा कैरोटिन और विटामिन सी काफी मात्रा में पाए जाते है। यही सब्ज़िया आपकी सेहत और खूबसूरती के लिए वरदान साबित होने वाली है।

[

पालक -हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में पालक प्रमुख है। यह शरीर में लोह तत्व की कमी को पूरा करता है विशेषरूप से महिलाओ के लिए पालक बहुत ही फायदेमंद है। 

महिलाओ में लोह तत्व की कमी अधिक होती है और उन्हें इसकी ज़्यादा जरूरत होती है। इसके अलवा यह शरीर में विटामिन ए,कैल्सियम और अन्य पोषक तत्वों की कमी को भी पूरा करता है


सलादपत्ता- सलादपत्ता की खेती सबसे पहले मिस्र में की गई। वहां से यात्रा करते हुए सलाद पत्ता अमेरिका पहुंचा और फिर इसके गुणों के कारण पुरे विश्व मे फ़ैल गया। आज अमेरिका की दूसरी सबसे ज़्यादा उपयोग में आने वाली सब्ज़ी में सलाद पत्ता का ही नाम है। अभी तो इसकी भारत में भी काफी मांग है। 

 

हरा प्याज -यह अन्य पोषक तत्वों के अतिरिक्त रोग प्रतिरोधक गुणों से भरपूर होता है और प्रतिरोधक क्षमता में इज़ाफ़ा करता है। यह आँखों और त्वचा के अलवा पाचनतंत्र के लिए भी फायदेमंद है। 

धनिया -यह किसी भी व्यंजन का स्वाद बढ़ा देता है। इसकी जरा सी मात्रा से खाने का स्वाद और पोषण बढ़ जाता है.साधारण सी दिखने वाली यह पत्ती बहुत ही गुणकारी है। इसमें विटामिन ए और सी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते है।

[

बनाने की विधि -

सामग्री - 

आटा ३५० ग्राम 

जीरा १० ग्राम 

हींग ५ ग्राम 

देशी घी ३० ग्राम 

हल्दी ३ ग्राम 

पालक पत्ता १०० ग्राम 

सलाद पत्ता ५० ग्राम 

धनिया पत्ता ३० ग्राम 

हरा प्याज़ ५० ग्राम 

हरी मिर्च २ न. 

लहसुन २ कलियाँ  

सैंधा नमक 

 

सभी सब्ज़ीओ और अच्छी तरह धो ले और मोटा मोटा (rufly) काट ले। 

अब एक पैन में थोड़ा सा घी डालकर गरम् करे जीरा डाले लहसुन को क्रश करके डाल दे। 

अब सब्ज़िया डाले और थोड़ी देर तक भुनने के बाद हल्दी, नमक और हींग भी डाले और धीमी आंच पर पकाये अब सभी सब्ज़िया  नरम हो गयी होंगी। थोड़ा पानी मिलाकर पीस ले। 

आटे में यही पेस्ट मिलाते हुए गूँथ ले। थोड़ी देर के लिए किसी कपडे से ढक कर रख दे। 

अब रोटियां बनाये और गरम रोटियों पर साथ साथ घी भी लगाते रहे। 

इन रोटियों को आप दही,अचार,अपनी मनपसंद सब्ज़ी के साथ खा सकते है। 

इसके अलावा रोटी का रोल बनाकर चाय के साथ खाने का अपना ही मज़ा है, ट्राई जरूर करे। 

  


मेथी पुरी, आंवला सीताफ़ल की सब्ज़ी


खाने को जब अधिक देर तक खाने योग्य बनाना होता है तो जरूरी है ऐसी सामग्री का प्रयोग न किया जाये जो  खाने को जल्दी ख़राब कर दे उसके विकल्प की खोज करनी चाहिए जैसे टमाटर की वजह से खाना जल्दी ख़राब होने का डर हमेशा बना रहता है इस रेसिपी में टमाटर की बजाय आंवले का प्रयोग किया गया जिससे जल्दी ख़राब होने का डर तो दूर होगा ही साथ ही वास्तव में आंवला गुणों की खान भी है।  

सफ़र के खाने का ‘पूरी सब्ज़ी’ एक अच्छा विकल्प है क्योंकि यह खाना ज़्यादा देर तक ताज़ा बना रह सकता है। 

खाना यदि स्वाद के साथ साथ पोषण की दृष्टि से भी अच्छा हो तो इससे ज्यादा अच्छा क्या होगा। इस रेसिपी में भी यही कोशिश की गयी है। 

 

इस रेसिपी में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री के पोषण के बारे में जान लेते है-  


मेथी-मेथी में अच्छी मात्रा में विटामिन और मिनरल्स पाए जाते है। इसमें कई तरह के विटामिन जैसे -विटामिन   ए , विटामिन के,विटामिन बी-६,फोलिक एसिड,थाइमिन,नियासिन। इसमें कई तरह के मिनरल्स जैसे- ज़िंक, सेलेनियम और मैग्नीशियम।

मेथी पेट के लिए बहुत अच्छी होती हैं और हमें अच्छी तरह ज्ञात है यदि पेट ठीक रहता है तो सब कुछ ठीक रहता है। मेथी मधुमेह को दूर रखने में मदद करती है। यह हड्डीयो के स्वास्थ्य के लिए भी मदद करती है। 

मेथी त्वचा और बालों के लिए भी उपयोगी है।   

 

आवला -संस्कृत भाषा में आंवले को अमृता, अमृतफल कहा गया है क्योंकि यह गुणों की खान है शायद ही कोई ऐसी बीमारी हो जिसमे आंवले का प्रयोग न किया जाता हो। 

चरक के मतानुसार आंवला शारीरिक अवनति को रोकने वाला,कल्याणकारी और धात्री (माता के सामान रक्षा करने वाला) कहा गया है। 

भारत में वाराणसी का आंवला  सबसे अच्छा माना जाता है। 

शीत ऋतु में आंवले का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि इन दिनों में इसका सेवन काफी गुणकारी है। 

आंवला एक प्रकार से भारतीय आयुर्वेद का मूलाधार भी है। 


'सीताफ़ल -सीताफ़ल में मुख्य रूप से बिटा कैरोटीन पाया जाता है जिससे विटामिन 'ए' मिलता है। 

यह खून में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायक होता हैं और अग्नाशय को भी सक्रिय करता है। 

भारत में इसकी कई प्रजातियां पाई जाती है जिन्हे उनके आकर- प्रकार और गुदे  के आधार पर मुख्य रूप से सीताफ़ल,चपन कद्दू,विलायती कद्दू,पेठा आदि कई नामो से जाना जाता है.

हमारे यहां विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर कद्दू की सब्ज़ी और हलवा आदि बनाना-खाना शुभ माना  जाता है। 

उपवास के दिनों में भी इसके बने व्यंजनो का सेवन करने का प्रचलन हमेशा रहा है।  

आगरा की प्रसिद्ध मिठाई ‘पेठा’भी ऐसी प्रजाति की सब्ज़ी से बनाई जाती है। 

अमेरिका,मैक्सिको,चीन और भारत इसके सबसे बड़े उत्पादक देश है।


बनाने की विधि -

 

सामग्री - 

आटा ५०० ग्राम

कसूरी मेथी ५० ग्राम

रिफाइंड तेल १/२ किलो

सीताफ़ल ४५० ग्राम 

आंवला ३ न. 

सरसों का तेल १०० ग्राम

सौंफ १० ग्राम  

जीरा १० ग्राम 

हींग ७ ग्राम 

मेथी दाना ५ ग्राम 

हरी मिर्च ५ न. 

हल्दी १० ग्राम 

गुड़  १५ ग्राम 

सैंधा नमक 

 

आटे में कसूरी मेथी को मिलाकर थोड़ा सख्त गूँथ ले। 

गीले कपडे से ढक कर  रख दे। 

आँवले के बीज निकालकर बारीक़ काट ले। 

ऐसी तरह सीताफल के भी बीजो को अलग करके छील ले और बारीक़ काट ले। 

एक पैन में तेल ड़ालकर सौंफ़ और जीरा को तड़कने के बाद चोप किये हुए आँवले डाल कर थोड़ी देर भून ले। 

दूसरे पैन में तेल डाल कर मेथी दाना डालें अब हींग डाल कर,कटा हुआ सीताफ़ल और साबुत हरी मिर्च भी डाल दे थोड़ी देर भुनने के बाद हल्दी मिला दे और पानी के साथ गुड़ भी डाल दे और धीमे धीमे पकने दे।

सीताफल नरम होने के बाद पका हुआ आंवला भी इसमें मिला दे। 

अब स्वादानुसार नमक डाले। सब्ज़ी तैयार है। 

पूरी बनाने के लिए रिफाइंड तेल गरम करे। 

आटे को थोड़ा सरसो का तेल मिलते हुए दुबारा से अच्छी तरह गूंधे। 

छोटी छोटी लोईया बनाकर पूरीया बनाए। 

और खट्टी मीठी सब्ज़ी के साथ खाये। 


चेट्टिनअट चना मसाला रोल


तमिलनाडु के शिव-गंगा जिले में चेट्टिनट क्षेत्र है जो स्थानीय व्यंजनों के लिए विशेष प्रसिद्ध है। 

इसके अलावा यहा की वास्तुकला और धार्मिक मंदिर भी पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करते है। 

यहां काली मिर्च का काफी मात्रा में प्रयोग किया जाता है। 


काबुली चना -सफ़ेद चना या चिकपीस या गरबोबिन्स पोषक तत्वों का एक पावरहाउस है,जो पौधा आधारित प्रोटीन, आहार फाइबर और कार्बोहइड्रेट से भरपूर होता है। 

यह एंटीऑक्सीडेंट और खनिजों जैसे लौह,जस्ता,मैग्निसियम,फोलेट और फॉस्फोरस से भी सर्मद्ध होता है। 

काली मिर्च - स्वाद कलिका (टेस्ट बड्स ) को उत्तेजित करती है जिससे पाचन में सुधार करके उदर सम्बन्धी सूजन,अपच,पेट फूलना,गैस जैसी समस्याओ से मुक्ति दिलाती है।

इसमें जीवाणुरोधी गुण भी होते है जो बैक्ट्रिया प्रेरित आंत्र रोगो का इलाज करने में सहायक है। 

काली मिर्च पाचन शक्ति और भूख  को भी बढ़ाती है। 

यह कफ़ को कम करने में सहायक है। 


बनाने की विधि

 

सामग्री

आटा १५० ग्राम  

बेसन १००  ग्राम 

काबुली चना (उबले हुए )  १५० ग्राम 

काली मिर्च  २ टी स्पून 

सौंफ १ टी स्पून 

इमली ५० ग्राम 

जीरा ५ ग्राम 

सरसों का तेल ५० ग्राम

तिल १५ ग्राम 

सैंधा नमक -

काला नमक -


थोड़ा बेसन (लगभग -३० ग्राम ) अलग बचाकर बाकी बेसन और आटा को थोड़ा सा नमक मिलाकर रोटी के आटे के तरह गूँथ ले। 

थोड़ी देर बाद इसकी रोटियां बना लेते है। 

काली मिर्च और सौंफ को पीस ले।

इमली को गरम पानी में डाल कर रखें।  

पैन में तेल गरम कर के फिर इसमें जीरा डाले अब  उबले हुए चने डालकर पीसी हुई काली मिर्च और सोंफ डाले। 

अब इमली का पानी और सैंधा और काला नमक भी मिला दे थोड़ी देर तक पकने दे जब तक सुख न जाये। 

इस चना मसाला को दो बराबर भागो में बाँट ले। 

एक भाग को पीस ले। 

रोटियों के एक तरफ ये पिसा हुआ चना मसाला फैलाए और इसके ऊपर बिना पिसा चना मसाला और तिल डाल कर रोल बना ले।

बचे हुए बेसन में थोड़ा सा नमक डाल कर  एक पतला घोल बना ले। 

रोल को इस घोल में डूबा कर तवा पर धीमी आंच में थोड़ा थोड़ा तेल डाल कर घुमा घुमा कर सेक  ले। 

रोल तैयार है,खाये भी और पैक करे अपने साथ ले जाने के लिए भी।


मोठ दाल का पंजाबी पोहा


पंजाब उत्तर पश्चिम भारत का एक विकसित राज्य है।

पंजाब शब्द फारसी के शब्दो पञ्च यानि ‘पांच’ और आब यानि ‘पानी’ से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है पांच नदियों का क्षेत्र। संस्कृत के ‘पंचनाद’ का भी यही अर्थ है, ये नदिया है -सतलज,व्यास,रावी,चिनाव और झेलम। 

चिनाव और झेलम अभी पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में है। 

सिख धर्म पंजाब का मुख्य धर्म है और ‘हरिमंदिर साहिब’ जोकि पंजाब के अमृतसर नगर में है सिखों का पवित्रम धार्मिक स्थान है। 

अमृतसर,लुधियाना,जालंधर,पटियाला और भटिंडा पंजाब के प्रमुख नगर है। 

कृषि पंजाब का सब से बड़ा उधोग है यहां तक की पंजाब को पृथ्वी का सर्वाधिक उपजाऊ क्षेत्र कहा जाता है। 

भारत के ६० % गेहू और ४० % चावल का उत्पादन पंजाब में ही होता है।


पंजाब का खाना उत्तरी भारतीय पाक कला की प्रमुख पहचान है। मक्खन और घी का यहां  खुली मात्रा में प्रयोग किया जाता है। दाल मखनी हो या बटर चिकन या सरसो का साग सब में एक बात कॉमन है वो है मक्कन का अधिकतम प्रयोग इसके अलावा खाना बहुत ही साधारण और कम से कम मसालों के द्वारा बनाया जाना पसंद किया जाता है।  भिन्न भिन्न दालों में तड़का लगाने का प्रचलन यही से जगत भर में फैला है।


पोहा बहुत ही जल्दी तैयार होने वाला पौष्टिक खाना है। यह एक हल्का आहार है और इसी कारण शरीर द्वारा आसानी से पचाया जा सकता है इसलिए पोहा का सेवन पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा रहता है। 

पोहा और इसमें डलने वाली अन्य सामग्री हमें पुरे दिन एनर्जी से भरपूर रखने में सहायक होती है। 

पोहा में आयरन की मात्रा काफी होती है जिसके कारण शरीर में आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है इसलिए गर्भवती महिलाओ के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है। 

आयरन शरीर के लिए बहुत ही जरूरी मिनरल है जो हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। 

पोहा कार्बोहइड्रेट के साथ साथ फाइबर का भी अच्छा स्रोत होता है।


मोठ दाल -मूंग दाल की तरह मोथ भी एक मोटा अन्न है जिसे वनमूँग भी कहा जाता है। 

मोठ की दाल कैल्शियम,कार्बोहइड्रेट व विटामिनों से युक्त होती है जोकि ज्वर और कृमि नाशक होती है। 


बनाने की विधि 

 

सामग्री :

 

पोहा -२५० ग्राम 

मोठ दाल-१०० ग्राम 

सरसो का तेल-५० ग्राम

मखन्न -५० ग्राम  

जीरा-७ ग्राम 

प्याज़-२ न. 

हरी मिर्च-३ न. 

सफल मटर -५० ग्राम 

हल्दी -७ ग्राम 

नीबू-१ न.

बेसन बूंदी -५० ग्राम 

पंजाबी मसाला पापड़ -३ न. 

सैंधा नमक -- 

 

दाल को अच्छी तरह धोकर ४ से ५ घंटे भिगो कर रख दे। 

फिर थोड़ा सख्त रहने तक उबालने के बाद छान कर रख लेते है। 

मिर्च को बीच से चीर ले और प्याज़ को बारीक़ काट ले।

पोहा को धोकर छलनी में डाल कर  छोड़ दे।

पापड़ को सेक कर क्रश कर लेते है ।   

तेल को गरम करके इसमें दाल को फ्राई कर ले। 

कढ़ाई में बटर को गरम करे जीरा डालें फिर प्याज़ और हरी मिर्च डालकर भुने। 

अब मटर भी डाल दे और साथ में ही हल्दी और नमक भी।

अब भीगा हुआ पोहा और नीबू का रस को भी डाले और अच्छी तरह मिलाए। 

अब फ्राई की हुई दाल को पोहा में मिला दे। 

बूंदी और पापड़ को भी पोहा में मिला दे। 

पंजाबी पोहा तैयार है, खाए भी और सफर के लिए भी पैक करे। 


कुछ मीठा हो जाये- सोया काजू कतली


जब भी ड्राई फ्रूट्स की बात की जाती है तो उसमे काजू का जिक्र जरूर होता है और यह लाज़िमी भी है। काजू  फ्रूट्स में प्रमुख स्थान जो रखता है और इसके पौष्टिक तत्व ऐसे और खास बनाते है। इसका उपयोग मिठाइयों में,और अलग -अलग प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों में किया जाता है। किसी भी खाद्य पदार्थ में इसको शामिल करने से उसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। 

वैसे तो काजू मुख्य रूप से ब्राज़ील से है परन्तु हमारे देश में भी इसकी खेती केरल,महाराष्ट्र,गोवा,कर्नाटक,तमिलनाडु,आंध्र प्रदेश,उड़ीसा एवम प. बंगाल में की जाती है। 

आयरन की पर्याप्त मात्रा होने के कारण काजू शरीर में खून के निर्माण में काफी मदद करता है जिसके कारण एनीमिया जैसी बीमारी में भी लाभदायक है। 

बालों से जुडी हुई किसी भी परेशानी से अगर आप जूझ रहे है तो काजू का सेवन आप के लिए बेहतरीन साबित होगा। दरसल काजू में आयरन,मैग्निसियम,फास्फोरस और ज़िंक जैसे पौष्टिक तत्व पाए जाते है जो बालो के लिए भी अति आवश्यक होते है।


दांतो और हड्डियों की मज़बूती के लिए भी काजू बहुत महत्वपूर्ण है।

मधुमेह के रोग में भी काजू का इस्तेमाल किया जा सकता है और इसका फायदा भी सकारात्मक परिणाम देगा। 

काजू की कतली जिसको काजू की बर्फी भी कहते है एक पारम्परिक भारतीय मिठाई है जो बनाने में भी बहुत ही आसान है क्योंकि इसमें बहुत ही कम सामग्री का प्रयोग किया जाता है। काजू कतली को ५ से ६ दिन सामान्य तापमान पर और फ्रीज़र में २० से २५ दिन तक भी स्टोर किया जा सकता है। 

काजू के अलावा केवल तीन चीजे इस कतली में मिलाने से यह और भी पौष्टिक हो जाती है, वो है----


गुड़ ---गुड़ का सेवन पेट के लिए काफी लाभदायक होता है क्योंकि इससे पाचन अच्छा होता है। 

गुड़ खाने से हीमोग्लोबिन की समस्या का समाधान होता है क्योंकि यह आयरन का बहुत ही अच्छा स्रोत है इसी वजह से यह खुन में लाल रक्त कणिकाओं को भी बढ़ता है। 

इसके अतिरिक्त गुड़ अन्य कई तरह से भी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है जैसे -आँखों के लिए,सर्दी जुकाम में,पीरियड के दौरान होने वाले दर्द में आदि।  

सौंफ -सौंफ की तासीर ठंडी होती है और शरीर को ठंडा रखने के काम आती है। सोंफ़ में कैल्सियम,सोडियम,आयरन और पोटासियम जैसे कई खनिज तत्व पाए जाते है। इसके अलावा इसकी सुगंध भी बहुत ही अच्छी होती है और ताज़की का एहसास करती है। 

सोया मिल्क पाउडर-सोयाबीन के गुणों से हम सभी परिचित है।इसमें प्रोटीन की बहुत अधिक मात्रा होने कारण यह मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करता है साथ की हड्डियों के लिए भी फ़ायदेकारी होता है।इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत कम होती है,जिससे आप दिल की बीमारियों से बचे रहते है।विटामिन बी १२ की भरपूर मात्रा होने के कारण इसका सेवन शरीर की कमजोरी को भी दूर करता है।


बनाने की विधि   

 

सामग्री:

काजू २५० ग्राम 

गुड़ १५० ग्राम 

सोया मिल्क पाउडर १०० ग्राम 

सौंफ १० ग्राम 

 

काजू को हल्का ड्राई रोस्ट करके मिक्सर में महीन पीस ले और सोया मिल्क पाउडर को इसमें मिला ले।  

गुड़ की चासनी बना लेते है चाशनी जब एक तार की हो जाये तब इसमें सौंफ भी डाल दे। 

अब चासनी को धीरे धीरे काजू और मिल्क पाउडर के मिक्चर में मिलते और आटे की तरह गूँथ लेते है।

अब इसको किसी पन्नी के बीचो-बीच रखकर रोटी की तरह बेल लेते है। 

अब इसको तिकोनी आकृति में काट लेते है। 

कतलिया तैयार है,थोड़ी देर फ्रिज में रखने से थोड़ी सख्त होने पर खाये। 


चटपटा चटनी पराँठा


खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए चटनी का इस्तेमाल बरसों से होता चला आ रहा है। चटनी का अर्थ होता है दो या उससे अधिक चीजों का मिश्रण। आम बोलचाल की भाषा में चटनी या खिचड़ी शब्द का प्रयोग वैसी चीजों के लिए किया जाता है जिसमे आनुपातिक मात्रा का कोई खास ख्याल नहीं रखा जाता। 

 

चटनी मूल रूप से भारत से ही है जिसमे मख्यतः हरी मिर्च और नमक के अलावा अन्य चीजों का खुली रूप में प्रयोग किया जाता है। ज़्यादातर चटनियों के बनाने में हरी मिर्च और नमक के अतिरिक्त अपनी पसंद की किसी भी खास सब्जी को चुना जा सकता है। ज्यादातर कच्ची  सब्जिओ की चटनिया वैसे तो सिलबट्टे पर पीसकर या मिक्सर में पीसकर बनाई भी जा सकती है परन्तु फलो की चटनिया बनाते समय उनका पका होना जरुरी है। 

 

चटनिया बनाते समय जिन मुख्य मसालों का प्रयोग किया जाता है उनमें नमक, जीरा, अदरक, लहसुन, नीबू, इत्यादि प्रमुख है। हमारे अपने और पड़ोसी देशों में चटनी को खाने से पहले ताज़ा तैयार किया जाता है जो आसानी से मिलने योग्य और मौसमी चीजों के द्वारा बनाना पसंद किया जाता है। अमेरिका और यूरोप के देशों में चटनी को मुख्य रूप से फ्रोज़न करके लम्बे समय तक उपयोग में लिया जाता है।


हमारे देश की कुछ लोकप्रिय चटनिया -

चटनिया हमारे देश के लगभग सभी राज्यों में भिन्न भिन्न प्रकार से बनाई जाती है जिनमे  पुदीना की चटनी, टमाटर की चटनी,प्याज़ की चटनी,धनिये की चटनी,आम की चटनी,नारियल की चटनी, लहसुन की चटनी,लाल मिर्च की चटनी आदि प्रमुख है। 

खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए चटनी और सोसेस का उपभोग हर जगह होता है फिर चाहे खाना किसी भी देश का ही क्यों न हो। भारतीय खाने में जहां एक और तमाम तरह की चटनिया है तो वही इटली, थाई, चाइनीज़, या अन्य देशों में सॉसेस या ड्रेसिंग का प्रयोग किया जाता है। 

सादा खाने को भी स्पेशल बनाने में चटनी का प्रयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। 

दक्षिण भारतीय खाना तो बिना चटनियों के अधूरा ही है और ये विभिन्न प्रकार की चटनिया सभी को पसंद भी बहुत आती है।


चटनी पोषण की दृष्टि से भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि खाने को पकाने में जिस तरह पोषक तत्वों का नुकसान होता है, वैसा चटनिया बनाने में नहीं होता। 

इस रेसिपी में जिन सामग्री का प्रयोग किया गया है वो वर्ष भर और लगभग सभी जगह आसानी से मिल जाने वाली है। 

एक बार इस तरह पराठे बनाने के बाद भी यह काफी देर बाद भी खाया जा सकता है जो पोषण की दृस्टि से भी अभूतपूर्व होगा। 

हमने अधिकतर देखा भी है अक्सर लोग सफर पर जाते समय परांठे ले जाना काफी पसंद करते है क्योंकि ये कई तरह से सफर के दौरान हमारे लिए काफी सुविधाजनक होते है जैसे -परांठो के साथ हमें किसी अन्य  सब्ज़ी की जरुरत नहीं होती,और खाने में भी आसानी रहती है  यहां तक की चलते हुए भी खा सकते है, गरम करने की भी कोई आवश्यकता नहीं है।  

पेट भरने के लिए और स्वास्थ्य एवम स्वाद  की दृष्टि प्रकार से भी परांठे ठीक रहते है। 

परांठो के साथ अचार का अधिकतर प्रयोग किया जाता है परन्तु चटनी परांठो के साथ अचार की भी आवश्यकता नहीं होगी इसके साथ ही ये शरीर को अत्यधिक पोषण देने वाले भी है।


इस रेसिपी में प्रमुख सामग्री के शरीर को मिलने वाले पोषण के बारे में थोड़ी जानकारी ले लेते है-

पुदीना- पुदीने को गुणों की खान माना जाता है. साधारण-सा दिखने वाला ये पौधा बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी प्रभाव रखता है. पुदीने की पत्ती में कई औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं. 

इसका एंटी-बैक्टीरियल गुण भी इसके फायदों में इजाफा करने का काम करता है।बदलते मौसम की वजह से त्वचा का रूखा होना स्वाभाविक है. इस रूखेपन से बचने के लिए रोज के खाने में पुदीना शामिल करें।  इससे भरपूर एंटीऑक्सीडेंट मिलेगा और त्वचा का निखार बरकरार रहेगा । 

पुदीने में पोटैशियम, मैग्नेशियम,कैल्शियम, फॉस्फोरस,विटामिन ए , सी,आयरन की मौजूदगी शरीर के लिए लाभकारी बनाता है। 

पुदीने में मौजूद मेंथोल माइग्रेन के सिरदर्द  को कम करने में मदद कर सकती है। यह संवेदनशीलता, मतली और जी मचलने के लक्षणों को भी कम कर सकता है। 

पुदीने की पत्ती पेट की मरोड़, पेचिश और खट्टी डकारों में भी लाभकारी हो सकती हैं। इससे मोशन की समस्या ठीक हो जाती है और पेट भी साफ रहता है।

पुदीने में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण सर्दी-जुकाम और साइनस से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में सहायक है। मेंथोल की वजह से आप को महसूस होगा की आप आसानी से सांस ले पा रहे हैं।

कुछ स्टडीज द्वारा पता चलता है कि पुदीना भूख  को कम कर देता है, जिसके कारण आप कम खाएंगे और आपका वजन भी नहीं बढ़ेगा।

हरा धनिया -धनिया डाइट्री फाइबर्स का  एक प्रमुख सोर्स है. इसके अलावा इसमें मैगनीज, आयरन, मैग्न‍िशियम भी भरपूर मात्रा में होता है. ये विटामिन सी, विटामिन के और प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स है. इसमें थोड़ी  मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, थायमिन और कैरोटीन भी पाया जाता है.

ये स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले कोलेस्ट्रॉल को कम करने और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है.

पाचन तंत्र के लिए भी ये विशेष रूप से अच्छा  है, ये लीवर की सक्रियता को बढ़ाने में मदद करता है.

डायबिटीज के मरीजों के लिए भी ये काफी फायदेमंद होता है. ये ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने का काम करता है.

धनिया एक शक्तिशाली प्राकृतिक सफाई करने वाला है। शरीर से भारी धातुओं और जहरीले तत्वों को साफ करने के लिए इसका प्रभावी ढंग से उपयोग होता है।  धनिये का प्रयोग एलर्जी,मूत्राशय की जलन और त्वचा से सम्बंधित एलर्जी की सूजन का इलाज करने के लिए किया जाता है। इससे जीवन शक्ति में सुधार होता है और दर्द घट जाता है। लौहतत्व और विटामिन ए, बी और सी से भरपूर,इसका भोजन में इस्तेमाल होने पर यह पौष्टिक मूल्य बढ़ता है। भोजन की पाचन शक्ति बढ़ जाती है और भूख कम हो सकती है। 

हरी मिर्च-कई तरह के पोषक तत्वों जैसे - विटामिन ए,बी ६,सी आइरन,कॉपर,पोटाशियम,प्रोटीन,और कार्बोहइड्रेट से भरपूर होती है,यही नहीं इसमें बीटा कैरोटीन,क्रिप्टोकसाथिन,लुटेन -जनकस्थिन आदि स्वास्थ्यवर्धक चीजे मौजूद है। 

हरी मिर्च  रक्त वाहिकाओं का रक्षक है  हरी सब्जियों में विटामिन सी और फ्लेवोनोइड प्रचुर मात्रा में होते हैं।

इसलिए, रक्त वाहिका की दीवार की लोच को बढ़ाने के लिए हरी मिर्च बहुत महत्वपूर्ण भोजन है।

हरीमिर्च मेलेनिन उत्पादन को रोक सकता है, उम्र बढ़ने से दूर रख सकता है। 

थकान को दूर करने में हरी मिर्च की महत्वपूर्ण भूमिका होती है,

हरी मिर्च में कैप्साइसिन होता है, यह वसा के चयापचय को बढ़ावा दे सकता है, शरीर में वसा के संचय को रोकता है, वसा को कम करने, वजन घटाने और रोग की रोकथाम के लिए अनुकूल है।

अदरक-अदरक का नियमित सेवन करने से यह आपकी सहनशक्ति को बढ़ाता है। इसका सेवन करने से आपके शरीर में जमा अतिरिक्त वसा कम होती है, जो कि मोटापे का विशेष कारण होता है। अदरक रोज़ खाने से वज़न कम हो सकता है।

पाचन सुधारने के लिए, भोजन करने के बाद अदरक का इस्तेमाल करें।

अदरक में उपस्थित कैडमियम लिवर में होने वाली विषाक्‍तता को कम करने में मदद करते हैं। 

अदरक पसीना निकलने की प्रक्रिया को बढ़ाता है। पसीना निकलने से रोम छिद्र  साफ होते हैं और विषाक्त पदार्थ नष्ट होकर पसीने के साथ बाहर निकल जाते हैं।

लहसुन-प्राचीन इतिहास में लहसुन सिर्फ दवाईया बनाने के काम में ही आता था, आधुनिक  वैज्ञानिक अब ये जानते है की लहसुन स्वास्थ्य के लिए इतना फायदेमंद क्यों है। लहसुन में सल्फर काफी मात्रा में पाया जाता है जो त्वचा के रोगो में और खून को पतला रखने में मदद करता है। लहसुन बेहद पौष्टिक होता है फिर भी इसमें कैलोरी की मात्रा काफ़ी  कम होती है इसके अलावा इसमें मेग्नीश,विटामिन बी ६ ,विटामिन सी,सेलेनियम,फाइबर  भी पाए जाते है। इसके अलावा लहसुन से पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, कॉपर, पोटैसियम,फास्फोरस, आइरन और विटामिन बी ७ भी मिलता है। 

सत्तू का आटा -सत्तू जैसा कोई भारतीय सुपर फ़ूड नहीं है। सत्तू में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके अलावा सत्तू में कैल्सियम,मेग्नीश,मैग्निसियम जैसे तत्व भी होते है जो शरीर के tissue की मरम्मत करते है सत्तू में कार्बोहइड्रेट भी काफी होता है जो शरीर को काफी मात्रा में ऊर्जा देने का काम करता है,जिसके कारण ही सत्तू को एनर्जी का पावरहाउस भी कहते है। सत्तू पेट को ठंडा रखने में साहयता करता है और शभी उम्र के लोगो के लिए फायदेमंद है। 

हींग--बदहज़मी,गैस की समस्या,छाती में दर्द, माहवारी की पीड़ा और अन्य किसी भी तरह के शारीरिक दर्द में दर्दनिवारक की तरह कार्य करती है। 

जीरा-जीरे में विटामिन सी , विटामिन-के,विटामिन बी  1, 2, 3, विटामिन-ई, प्रोटीन, कैल्शियम, मेग्नेशियम, पोटेशियम, जिंक, कॉपर, आइरन , कार्बोहाइड्रेट जैसे तमाम तत्व पाए जाते हैं।

काला नमक एसिडिटी व अन्य अपच में,पेट दर्द में लाभदायक है। 

सैंधा नमक शारीरिक दर्द और स्ट्रेस में बहुत उपयोगी है।


बनाने की विधि

सामग्री: { ६ पराठे के लिए}

 

आटा (मल्टीग्रेन) ५०० ग्राम 

सैंधा नमक  स्वादनुसार 

काला  नमक स्वादनुसार 

आमचूर्ण  १० ग्राम   

पुदीना  १०० ग्राम 

हरा धनिया १५० ग्राम 

हरी मिर्च २५ ग्राम 

अदरक २५ ग्राम 

लहसुन २०ग्राम

प्याज़ १००ग्राम 

सत्तू का आटा -१००ग्राम

हींग    ५ग्राम

जीरा  १५ग्राम

देसी घी १००ग्राम


आटा को थोड़ा सा सैंधा नमक डालकर गूँथ ले। 

पुदीना की पत्तिया तोड़कर,और धनिया को अच्छी तरह  धोकर बारीक़ काट ले। हरी मिर्च को भी बारीक़ बारीक़ काट ले। ऐसी तरह अदरक, लहसुन और प्याज़ को भी बारीक़ काट ले।  

जीरा को गरम तवा पर भुनने के बाद बेलन से बारीक़ क्रश  कर ले। 

अभी एक बाउल में पुदीना,धनिया हरी मिर्च,अदरक,लहसुन,प्याज़,आमचूर्ण, और सैंधा व काला नमक बराबर मात्रा में डाल कर  मिला ले। 

थोड़ी देर में ये सब्जिया पानी छोडेंगी तब सत्तू का आटा डालकर टाइट कर ले और छोटी छोटी गोलिया बना ले। 

आटे की बराबर मात्रा में लोई बना ले। इस लोई के अंदर एक सब्जी की गोली भरकर बेल ले। 

मध्यम आंच पर दोनों तरफ से पूरी तरह सेंक लेने के बाद ही घी लगाए और तुरंत ही आंच से उतार ले (घी पकने के बाद लगाए न कि  घी लगाकर पकाये )

इसी तरह अन्य लोइयों को भी भरकर पकाकर ही घी लगाए। 

पराठे तैयार है आपके  सफर को खुशनुमा बनाने के लिए।


सफ़र की सतरंगी सलाद-सरल और शक्तिशाली


सलाद शरीर के लिए जितनी अच्छी होती है, उसको बनाना उतना ही आसान। अधिकतर हमने देखा भी है जो लोग अपने खाने में जितना अधिक सलाद का सेवन करते है वो उतने ही ज्यादा फिट नज़र आते है। 

आज के समय में सलाद खाने का साइड (सह) हिस्सा ना होकर अपने आप में पूर्ण भोजन बन गया है क्योंकि लोग दिन प्रतिदिन अपनी सेहत के प्रति काफी सजग होते जा रहे है।


सलाद खाने से हमारी पाचन क्रिया अच्छी तरह से काम करती है जिससे हमें गैस, एसिडिटी और पेट सम्बन्धी  बीमारी नहीं होती। सलाद खाने से हमारे चेहरे पर चमक आती है, हम ज्यादा फिट रहते है। 

हमारी त्वचा और बाल दोनों में नमी बनी रहती है।

सलाद को रोज़ाना अपने भोजन का हिस्सा बनाने से उम्र का प्रभाव शरीर पर कम पड़ता है। शरीर में अतिरिक्त कैलोरी को कम करने में भी यह मददगार है, इससे वसा कम होती है,क्योंकि यह फाइबर  का अच्छा स्रोत है। 

जो लोग मोटापा कम करना चाहते है या वजन घटाने की सोचते है उनके लिए सलाद काफ़ी मददगार हो सकता है।सलाद हेल्दी डाइट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह वेट लॉस करने के साथ साथ पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है। सलाद से हमारी इम्युनिटी बढ़ती है।

किसी भी सलाद की रेसिपी को हम अपने हिसाब से अनुकूलित (cusomized ) कर सकते है और ऐसी सामग्री का प्रयोग कर सकते है जो और ज्यादा पोषक हो, और आपको पसंद भी। 

इस रेसिपी को भी इसी तरह तैयार किया गया है, जिसको बनाना एकदम सरल है और एक बार बनने के बाद यह कभी भी, कुछ अपनी पसंद की ताज़ी सब्ज़ियाँ मिला कर खाई जा सकती है। 

यह सब सामग्री जो यहां इस रेसिपी में प्रयोग की गयी है बहुत ज्यादा पोषण से भरपूर है और सफर के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर रखने में और स्वस्थ रहने में हमारा महत्वपूर्ण सहयोग कर सकती है।

पहले हम इस रेसिपी में प्रयोग की जाने वाली प्रमुख चीजों के मुख्य गुणों के बारे में जान लेते है-- 

भुना चना--- चने में कार्बोहइड्रेट,प्रोटीन, नमी, कैल्शियम, आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते है ये मोटापा घटाते है जबकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते है। पेशाब और कब्ज की समस्या दूर होती है, पाचन शक्ति सुद्रढ़ होती है।  

मूमफली ----प्रोटीन, तेल, फाइबर की प्रचुरता के साथ साथ पॉलीफेनल,एंटीऑक्सीडेंट,विटामिन और मिनरल्स भी पाए जाते है।  यह सर्दी-जुकाम,वजन नियंत्रण,त्वचा संबंधी परेशानियाँ में काफी लाभदायक होती है। इसके अलावा यह ब्लड शुगर में, और अन्य कई शारीरिक बीमारियों से हमारा बचाव करने में सक्षम है।  

मखाना--कोलेस्ट्रॉल, फैट और सोडियम की मात्रा कम होने के कारण मखानो का शरीर के लिए अपना ही एक विशेष महत्व है। ये ग्लूटन मुक्त जबकि प्रोटीन समृद्ध होते है इनमे कार्बोहइड्रेट भी काफी होता है। मखाना मधुमेह व उच्च रक्तचाप में बहुत अच्छा है। मखाना खाने से अच्छी नींद आती है क्योंकि यह तनाव को काम करता है। दस्तों को ठीक करने में भी मखाने का प्रयोग ठीक रहता है इसके साथ ही यह कब्ज को दूर रखता है और भूख को  बढ़ाता है। यौन रोगो में तथा बांझपन में भी मखाने से बहुत लाभ मिलता है। यह गर्भावस्था में माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। वजन कम करता है,चेहरे पर जल्दी से झुर्रिया नहीं पड़ने देता, एक प्रमुख एंटी एजिंग है। 

पका नारियल --सफर के दौरान उलटी आना सामान्य सी बात है और इसमें नारियल का सेवन बहुत ही ठीक रहता है।(शायद इसीलिए बस स्टेशनो पर हमें नारियल बेचने वाले अक्सर मिल जाते है ) गर्मी के दौरान कई बार नाक से खून आ जाता है तो नारियल इसमें भी दवा की तरह कार्य करता है। नारियल में एन्टीबैक्ट्रियल,एंटीफंगल और एंटीवायरल तत्व पाए जाते है जो रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते है, विशेष-रूप से गर्भवती महिलाओ में।  

किशमिश--विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, सेलिनियम, आयरन  के अलावा कई सारे एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते जिसके कारण किशमिश कब्ज़, गुप्त रोग, लिवर की कमज़ोरी, आँखों की समस्या में हितकर है और हड्डियों को मज़बूती भी देती है। 

काजू---रक्तचाप में सुधार, हृदय रोग, कैंसर,मधुमेह, आदि रोगों में काजू बहुत लाभदायक है और साथ ही यह हड्डियों का अच्छा विकास,स्वस्थ दिमाग, स्वस्थ रक्त, गर्भावस्ता में और त्वचा सम्बन्धी परेशानियों में भी महत्वपूर्ण कार्य करता है। 

राई ---भूख लगने की प्रक्रिया को धीमा करती है, जिसके कारण हम अधिक खाने से बचते है, आलस्य नहीं आता, वजन नियंत्रण में रहता है। अस्थमा, हृदय रोग, कब्ज़ आदि में भी हितकर है। 

हींग--बदहज़मी,गैस की समस्या, छाती में दर्द, माहवारी की पीड़ा और अन्य किसी भी तरह के शारीरिक दर्द में दर्दनिवारक की तरह कार्य करती है। 

इसके अलावा हल्दी सर्वोत्तम एंटीबायोटिक है। 

काला नमक एसिडिटी व अन्य अपच में,पेट दर्द में लाभदायक है। 

सैंधा नमक शारीरिक दर्द और स्ट्रेस में बहुत उपयोगी है।


बनाने की विधि 

सामग्री: 

भुना चना २५० ग्राम 

मूमफली दाना १५०  ग्राम 

मखाना १००  ग्राम 

मुरमुरे ५० ग्राम 

सूखा नारियल १ न. 

किशमिश ५० ग्राम 

काजू ५० ग्राम

देसी घी ५० ग्राम 

अचार का तेल ३० ग्राम 

सुखी लाल मिर्च ५ न.  

राई ५ ग्राम 

करी पत्तिया १५ न. 

हींग १ टी स्पून 

हल्दी १ टी स्पून 

काला नमक 

सैंधा नमक 

प्याज़,टमाटर,खीरा,गाजर,धनिया 

ताज़ी पत्तिया (पालक,lettuce,kale etc )

धीमी आंच पर कढ़ाई में मखाना को भुन (dry roast ) ले, हाथ से तोड़कर देख ले (जब करारा हो जायेगा तो पूरा टूट कर बिखर जाता है),जब भुन जाये तो कढ़ाई से बाहर निकल ले। अब, इसी तरह पहले मूमफली और काजू को भूनते है और बाद में चना भी मिला देते है थोड़ी देर और भूनने के बाद मुरमुरे भी इसी में डाल  देते है और अच्छी तरह मिला देते है। आंच बंद करके कढ़ाई को खाली कर लेते है। 

अब मध्यम आंच पर कढ़ाई में घी गरम करते है और गरम  होने पर सुखी लालमिर्च को काला होने तक फ्राई करके हटा देते है अब इस मिर्च फ्लेवर घी में अचार का निकला हुआ तेल भी मिला देते है. 

घी गरम होने के बाद पहले राई फिर करी पत्तिया चटकने तक भूनते है फिर हींग, हल्दी और दोनों प्रकार के नमक आधी आधी मात्रा में डाल देते है,अब मख़ाने मिला देते है थोड़ी देर भूनने के बाद बारीक़ कटा हुआ नारियल मिलाकर आंच बंद कर देते है। 

अब अन्य सभी बची हुई सामग्री -किशमिश,चना,मूमफली,मुरमुरे,काजू को भी इसी में अच्छी तरह मिला देते है। 

सलाद का बेस तैयार है। किसी टाइट ढक्कन वाले डिब्बे में भरकर रख ले।


जब भी आपको सलाद खाने का मन करे तो या तो आप इसको ऐसे भी खा सकते है  या आधी मात्रा इस मिश्रण की और आधी मात्रा में अपनी मनपसंद सब्ज़ियाँ जैसे प्याज़,टमाटर,खीरा,गाजर,हरा धनिया,पुदीना,पत्तेदार दार सब्जियाँ इसमें मिला क़र खाये,और भरपूर पोषण के साथ साथ अतुलनीय स्वाद भी पाए।


सफ़र का खाना -आतिशी अचारी आलु


अचार के बारे में सोचते ही हमारे मुँह में एक एहसास सा हमको महसूस होता है यह अचार के अलग स्वाद और चूकि हम सभी अचार का स्वाद को भलि- भाति जानते और समझते है उसके कारण होता है। 

अचार की विधि के हम ‘हिंदुस्तानी’ ही जन्मदाता है और यह हुआ लगभग २४०० ई.पु. के आस पास हुआ।  

इसके बाद बौद्ध लोगो ने जो काफी भ्रमण करते थे अचार को एशिया में काफी प्रशिद्ध किया क्योंकि अचार सफर के लिए काफी ठीक रहता है ना ही तो इसको गरम करने की जरूरत होती है और ना ही इसके जल्दी ख़राब होने का डर, इसी वजह से ये लोग अपनी यात्रा में अचार को अन्य खाद्य वस्तुओं से कुछ ज्यादा ही प्राथमिकता देते थे।

फिलीपींस,इंडोनेशिया,मलेशिया,सिंगापुर,ब्रूनेल आदि देशों ने इस विधि को पूरी तरह अपना लिया। 

इंडोनेशिया से यह नीदरलैंड और फिर अन्य देशों में पहुंच गया।

हमारे देश मे भी अलग अलग राज्यों मे वहाँ पर चीजों की उपलब्धता के हिसाब से अचार को बनाने की कला में काफी अंतर देखा जाता है जैसे -दक्षिणी भारत में अचार तिल  के तेल में जबकि उत्तर भारत में सरसों के तेल में बनया जाता है। दक्षिणी भारत का अचार ज्यादा तीखा भी होता है।

भारत में हरियाणा का पानीपत शहर अचार उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है क्योंकि यहां अचार का करोड़ो का वार्षिक व्यापार होता है। पचरंगा,सतरंगा,और अन्य कई नामो से यहां विश्व प्रसिद्ध अचार बनाये जाते है।

तेलांगना और आंध्रा प्रदेश सबसे तीखे अचार के लिए जाने जाते है। 

तमिलनाडु में आम का अचार अरंडी (castor ) के तेल  में बनाये जाने के कारण एक अनोखा स्वाद लिए होता है। इसके अलावा वहां साबुत लाल मिर्च में दही और नमक भरकर भी अचार बनाया जाता है इसको ‘मोर मोलागई’ कहते है और यह चावल के साथ खाया जाने वाला एक बहुत प्रसिद्ध अचार है।

बचपन से लेकर आज तक हममे से अधिकतर लोग जब भी किसी लम्बे  सफर पर जाते है तो कम से कम दो समय का खाना तो घर से ही साथ लेकर निकलते है, अब चाहे पूरी हो या पुलाव, रोटी हो या परांठा, चावल हो या चिड़वा ये सब बदल बदल कर हो सकते है पर एक चीज है जो नहीं बदलती और वो यही है यानि हमारे सफर का हमसफ़र अचार।

और कई बार हमने देखा है कुछ लोग तो केवल रोटी या परांठा ही बाहर से लेते है बाकी अपने घर से लाये गए अचार के साथ ही रोटी खाकर उनका खाना पूरा हो जाता है।

इस रेसिपी मे आप सब्ज़ी और अचार दोनों का स्वाद ले सकते है और इसको बनाकर अपने साथ अन्य लोगो के स्वाद और सफ़र को यादगार बना सकते है।


बनाने की विधि 

 

सामग्री  

छोटे वाले आलू  १ किलोग्राम 

हल्दी ४ ग्राम 

नमक स्वादनुसार 

सरसो का तेल  ३० मिलीलीटर 

घी १०० ग्राम 

प्याज़ १५० ग्राम 

साबुत लाल मिर्च ७ न. 

लौंग  ५ न. 

राई (सरसों ) ३ ग्राम 

हींग ३ ग्राम

देग्गी मिर्च ५ ग्राम 

जीरा ४ ग्राम 

कलोंजी ३ ग्राम 

सौंफ ४ ग्राम 

गुड़ ३० ग्राम 

अदरक १५ ग्राम 

लहसुन १२ फलिया 

नीबू का रस ३० मिलीलीटर 

दही २०० ग्राम


आलुओ को अच्छी तरह धो कर बिना छीले ही दो भागो (एक का दो) मे काट लें ।

पतीले में आलुओ को कवर होने तक (या उससे भी कम ) का पानी भरकर उबलने के लिए चढ़ा दे,और साथ में थोड़ा- थोड़ा सा हल्दी,नमक,जीरा,सोंफ,कलोंजी भी पानी में डाल देते है।

जब आलू थोड़े नरम हो जाए तो पानी छान ले और यहां हमको कोशिश ये करनी चाहिए की पानी आलुओ को उबालते हुए ही सुख जाये तो ज्यादा अच्छा रहेगा (पानी की मात्रा और आंच कम- ज्यादा करने से आसानी से हो जाता है ) 

प्याज़ को स्लाइस जबकि लहसुन और अदरक को बारीक़ (chop) काट ले। दही को फैट ले। 

कढ़ाई में सरसों का तेल धुआँ निकलने तक गरम करें ताकि उसका तीख़ापन ख़त्म हो जाये। आंच धीमी करके घी को इसमें ही मिला दे जब थोड़ा गरम हो जाये तब कटा हुआ प्याज़ डाले और ब्राउन होने तक फ्राई करे,पकने के बाद प्याज़ को कढ़ाई से बाहर निकाल ले।  

अब इसी तेल को पुनः गरम करके साबुत लालमिर्च डाल कर काला होने तक पकाए अब मिर्च को निकल कर हटा दे, इनसे हमको इस घी में जो फ्लेवर लेना था वो आ गया है।  

अब तेल में राई,हींग,लौंग डालकर कड़कने तक पकाते है, इसके बाद जीरा , सौंफ, कलोंजी डालने के साथ ही उबले हुए आलू भी डाल दे। अदरक लहसुन और गुड़ डालकर २ से ३ मिनट तक अच्छी तरह से भुने। अब थोड़ा सा पानी डालकर और पकाए। नीबू का रस डाले और अच्छी तरह मिला ले।  

आंच बंद करके दही डाल कर बंद आंच पर ही मिलाते रहे जब थोड़ा ठंडा हो जाये तो फिर धीमी-धीमी आँच पर पकाए क्योंकि तेज आंच पर दही के फटने का डर काफी ज्यादा रहता है। 

अब मसाला गाढ़ा होने के बाद फ्राई किया हुआ प्याज़ मिलाकर पकाये।  

‘आतिशी (spicy) अचारी आलु’ तैयार है, सफ़र में आपके साथ जाने के लिए। रास्ते भर खाये और जरुरतमंदो को भी खिलाये क्योंकि खुशियाँ औरो को खिलाने से भी बहुत मिलती है।

 

किसी ने क्या मार्मिक लिखा है ---

रोटियां ३ दिन पुरानी थी 

और भूख ४ दिन 

वो गरीब बड़े आराम से खा गयी 

क्योंकि रोटी भूख के मुक़ाबले 

ताज़ी थी।


कैसे बनाए बंजारन ब्रॉकली


हम इस बात से भली- भाती अवगत है कि सब्ज़ियाँ हमारे भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन्ही सब्जियों में से एक सब्ज़ी है ब्रॉकली,जिस का सेवन हमें कई बीमारियों से बचा सकता है। 

ब्रॉकली भी गोभी परिवार का सदस्य है शायद इसीलिए सामान्य बोलचाल की भाषा में इसको हरी गोभी भी कहते है,पर बता दे ब्रॉकली ‘इटेलियन’शब्द है।

 शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव

ब्रॉकली के सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकता है। 

ब्रॉकली में प्रोटीन,कार्बोहइड्रेट,कैल्शियम,आयरन,विटामिन ए और सी और इसके अलावा कई अन्य पोषक तत्व बड़ी मात्रा में पाए जाते है।

ब्रॉकली में सेलेनियम और ग्लूकोसिनोलेटस के होने से शरीर में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है जो ह्रदय के लिए काफी अच्छी होती है। 

यदि आप नियमित ब्रॉकली का सेवन,व्ययाम और खानपान का ध्यान रखेंगे तो यह आपके वजन को कम करने में सहायता करेगी।इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट होते है जिससे चर्बी घटती है।

ब्रॉकली में सल्फोराफिन नामक यौगिक होता है जो कैंसर को होने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है। 

यदि आप भूलते ज़्यादा है तो ब्रॉकली खाना ना भूले क्योंकि यह आपकी याददाश्त को बढ़ाने में सहायता करती है,क्योंकि इससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है। 

ब्रॉकली में ढेर सारे पोषक तत्व होने के कारण गर्भाव्स्था में माँ और बच्चे दोनों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह बहुत लाभदायक हो जाती है।

ब्रॉकली में पाए जाने वाले ग्लुकोराफानिन,ग्लुकोनास्तुरटिन,और ग्लूकोबरसीसिन होते है जो शरीर में से विषैले तत्वों को निकालकर इसे साफ करते है,जिससे पाचन भी अच्छा हो जाता है।

ब्रॉकली में सल्फोराफेन पाया जाता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने का काम करता है,जिससे बीमार होने की समस्या कम होती है।

सल्फोराफेन के कारण यह हमारी त्वचा को अच्छा रखती है और चेहरे पर जल्दी से झुर्रिया नहीं पड़ती।   

ब्रॉकली में लाइकोपिन के साथ विटामिन सी होने के कारण यह पुरुषों के यौन जीवन को बेहतर रखने में मदद करती है।

इसके अलावा ब्रॉकली बालों के लिए,शरीर में पी एच स्तर के लिए,एलर्जी,मधुमेह,आँखों के रोग,हड्डियाँ और दन्त रोग,लिवर की बीमारियां आदि में लाभदायक है।

बनाने की विधि 

सामग्री:

 ब्रॉकली १ किलोग्राम 

साबुत मसाला 

(हरी इलायची २,मोती इलायची १,

लौंग  २, तेजपत्ता १ )

सरसों का तेल ८०  ग्राम 

प्याज़ २०० ग्राम 

टमाटर १०० ग्राम 

हरी मिर्च ४ न. 

अदरक ३० ग्राम 

धनिया दाना १० ग्राम 

साबुत लाल मिर्च ४ न. 

हल्दी ७ ग्राम 

देग्गी मिर्च १०

हरा धनिया १५ ग्राम 

नमक  स्वादानुसार 

कसूरी मेथी २ ग्राम 

ग्राम मसाला ५ ग्राम


  •   ब्रॉकली के छोटे छोटे फूल तोड़ लेते है,तनो को चाकू से काट लेते है।
  • पानी में साबुत मसाले डाल कर उबालते है जब पानी अच्छी तरह उबल जाता है फिर इसमें ब्रॉकली को २ से ३ मिनट के लिए उबाल लेते है फिर छान कर रख लेते है।
  • प्याज़,टमाटर,हरी मिर्च,अदरक,धनिया को अच्छी तरह धोकर बारीक़ काट लेते है।
  • साबुत धनिया और साबुत लाल मिर्च को कूट लेते है।
  • मध्यम आँच पर पतीले में तेल डालते है,जब तेल गरम हो जाये तो प्याज़,अदरक हरी मिर्च डालकर भूनते है। अब कुटा धनिया और कुटी मिर्च डाल देते है। थोड़ी देर भुनने के बाद टमाटर डालकर पकाते है,अब हल्दी,देग्गी मिर्च और थोड़ा सा पानी डालकर पकाते है।
  • मसाला पकने के बाद कटा हुआ हरा धनिया और नमक भी डाल देते है अब उबली हुई ब्रॉकली को इस मसाले में अच्छी तरह मिलाते है।  अब कसूरी मेथी  और गरम मसाला मिला देते है।
  • बंजारन ब्रॉकली तैयार है। अपने हिसाब से इसकी गार्निश क़र सकते है(जैसे-टमाटर,तिल) और ऐसा बिलकुल भी जरूरी नहीं है की आप इसके साथ रोटी,पराँठा या कुछ और खाये इसको अकेला ही खायेंगे तो और ज्यादा अच्छा है।    और एक बात “कम खाये पर अच्छा खाये 

ख़ानाबदोश खिचड़ी


भारत इतनी विभिन्नताओं वाला देश है कि थोड़ी थोड़ी दूर चलने पर लगता है कितना  कुछ बदल गया। 

एक कहावत भी हमारे देश को कितनी अच्छी तरह परिभाषित करती है- “कोस कोस पर बदले पानी चार कोस पर बानी” इसका तात्यपर्य  लगभग प्रत्येक ३ किमी में हमारे यहाँ पानी का स्वाद और लगभग १२ किमी में बोलचाल की भाषा बदल जाती है। 

ठीक इसी तरह खाना भी बदलता रहता है,पर कुछ चीजे है जो लगभग हर राज्य में किसी न किसी रूप में मौजूद है उनमे से जो प्रमुख है वह है खिचड़ी।

खिचड़ी,खिचुरी,खिचरी,किसुरी,बिसी बेले भात ,पोंगल आदि विभिन्न रूपों में हमारे देश में बनाई जाती है।

शायद इसीलिए पकवानो की इतनी विभिन्ताओं के बाबजूद खिचड़ी को लोगो ने राष्ट्रीय डिश भी माना है और भारत सरकार ने भी इसका प्रचार प्रसार “सभी खाध्य पदार्थो की रानी” (Queen of all foods) के रूप में किया है।

गुजरात में जहां खिचड़ी को कढी के साथ,वही बंगाल में बैगन या अंडा के साथ खाया जाता है जबकि  हरियाणा में घी और लस्सी के साथ। 

बिहार में खिचड़ी को गरम मसलो के साथ पकाया जाता है तो वही दक्षिणी भारत में काली मिर्च के साथ।

शायद हम में से ज़्यादातर लोगो ने माँ के दूध के बाद जब पहली बार कुछ खाया था तो पूरी उम्मीद है,खिचड़ी ही होगी,क्योंकि सामान्यतयः बच्चे का पहला भोजन खिचड़ी ही होती है,क्योंकि यह बहुत सुपाच्य है। इसी सुपाच्यता के कारण बीमारी में अधिकतर लोगो को खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है।

खिचड़ी पाचन में आसान होने के कारण पेट में समस्या होने के बावजूद खायी जाती है,खासकर अतिसार (दस्तो)में खिचड़ी का सेवन बहुत अच्छा रहता है।

हमने अधिकतर एक कहावत सुनी होगी “बीरबल की खिचड़ी” इस से हमें मालूम चलता है हम कितने वर्षो से खिचड़ी खा रहे है। 

अकबर से पहले भी खिचड़ी का जिक्र सेल्यूकस,इबनबतूता ने भी किया है।

इस रेसिपी में खाद्य वस्तुओँ का इस तरह प्रयोग किया गया है ताकि यह जल्दी से ख़राब न हो।

यदि आप आगरा से अजमेर जा रहे है तो सुबह नाश्ते में आगरा में बनाए और शाम  को डिनर में अजमेर में खाये और चाहे भले ही आप जयपुर में लंच में भी खाये आप को भरपूर स्वाद और प्रोटीन मिलेगा और अन्य पोषक तत्व भी।

इसके अलावा यह आपकी सेहत के लिये  भी अति उत्तम रहेगी रास्ते भर आपके पेट का ख्याल रखेगी और जिससे वास्तव में आपका सफर सुहाना होगा।


बनाने की विधि 

सामग्री 

साबुत हरी मूंग दाल १ कप 

धूली  मूंग दाल १/२

काला चना  १/२ कप 

चावल(बासमती टुकड़ा) १.१/२ कप

घी १/२ कप

जीरा २  टी स्पून

राई  १/२ टी स्पून 

हींग १/२ टी स्पून

गाजर १०० ग्राम 

बीन्स १०० ग्राम 

आलू   १ न.  

हरी मिर्च २ न. 

हल्दी १.१/२   टी स्पून  

काला नमक १/२ टी स्पून  

सैंधा नमक  स्वादानुसार 

हम यहां कुकर का प्रयोग नहीं कर रहे है क्योंकि कुकर या एल्युमीनियम के बर्तनो में खाना बनाना शरीर के लिए हितकर नहीं है

इसलिए चन्ना,चावल और दालों को ४ घंटे पहले अच्छी तरह धोकर भिगो कर छोड़ देते है।

गाजर, बीन्स को बारीक़ काट लेते है और आलू को थोड़ा मोटा ही काटते है।

पतीले को माध्यम आंच पर रखकर घी डाले ,गरम होने पड़ जीरा फिर राई,हींग उसके बाद हरी मिर्च को हाथ से तोड़कर ही डाल देते है। 

अब कटी हुई सब्जिया डाल कर थोड़ा भूनते है फिर हल्दी डाले। 

अब दाल, चना, चावल जो भीगे हुए थे डाल  देते है और लगभग ५ कप पानी डाल देते है,काला नमक डाले।

थोड़ी देर बाद सैंधा नमक स्वादानुसार डाले। 

अब पतीले को ढक कर जब तक पकाते है जब तक दाल, चावल अच्छी तरह गल न जाए।

पानी की मात्रा कम ज़्यादा कर सकते है (आपको कितना पतला या गाढ़ा खाना पसंद है ) खिचड़ी ठंडा होने पर स्वयं भी काफी गाढ़ी हो जाती है ख्याल रखे।

खिचड़ी तैयार है गरमागरम खाए और ठंडी करके पैक करे। 

आप जब भी इसको खाए तो इस पर ऊपर से घुमक्कड़ घी डाल कर खाएंगे तो आपको अतुलनीय स्वाद मिलेगा।

इसके अलावा याद रखे “खिचड़ी के है चार यार पापड़,खीरा,दही,अचार”

पापड़ आपको करारापन वही खीरा और दही इसका पोषण और बढ़ाएंगे और अचार से आप खाने का नमक मिर्च बैलेंस कर सकते है।

इस रेसिपी में सब्जियों जैसे प्याज़,टमाटर,गोभी आदि का प्रयोग नहीं किया गया है क्योंकि इनको डालने से जल्दी ख़राब होने का डर रहता है और हमारी खिचड़ी तो ख़ानाबदोश है सुबह यहां तो शाम को कही और।

यदि घर पर बनाना है तो जितनी भी पसंद की सब्जिया है सब को डालो क्योंकि सब चलता नहीं,   डलता है (खिचड़ी जो ठहरी ) और ज्यादा पोषण मिलेगा।

और एक बात याद रखे “कम खाये पर अच्छा खाये


दाल कबीला


सफ़ेद उड़द (उरद ) दाल से बनायीं जाने वाली यह रेसिपी बड़ी आसान है,इसमें टमाटर,धनिया और अदरक का प्रयोग इसको स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाता  है।

उरद दाल के शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव

यह वात को कम करने वाली,शक्तिवर्धक,वजन और शुक्राणु बढ़ने वाली कफ़पित्त वर्धक होती है।

यह प्रकृति से मधुर,खाने में रूचि बढ़ने वाली,रक्तपित्त के प्रकोप को कम करने वाली है। 

इसका प्रयोग बवासीर ,साँस की बीमारी में लाभप्रद होता है।

अनिंद्रा में इसका सेवन अच्छा रहता है,उरद दाल मांसवर्धक और पुष्टि-कर होती है। 

इसके अलावा इसमें कैल्शियम,पौटेशियम,आयरन, ज़िंक,जैसे अनेक पौष्टिक तत्व होते है।

सामग्री:

धुली उरद दाल                    २५० ग्राम 

घी                                      ५० ग्राम 

लहसुन पिसा हुआ             ३० ग्राम 

साबुत सुखी मिर्च               १० न 

धनिया दाना                      १० ग्राम

हींग                                   ५ ग्राम 

टमाटर                            ७५० ग्राम 

हरा धनिया                       ३० ग्राम 

हरी मिर्च                             ४ न.

अदरक                              २५ ग्राम 

नमक                                स्वादानुसार 

मक्खन                            १०० ग्राम 

गरम मसाला                     १० ग्राम 

कसूरी मेथी                       ५ ग्राम 

नीबू का रास                   ३० मिली


दाल को अच्छी तरह धोकर २ घंटे के लिए पानी में भीगो दे। 

अब लगभग ३ लीटर पानी में नरम होने तक उबाले और छान कर रख ले। 

टमाटर,प्याज़,अदरक,हरी मिर्च और हरा धनिया को अच्छी तरह धोकर बारीक़ काट ले। 

सुखी लाल मिर्च और धनिया दाना को कूट ले।

कढ़ाई में घी गरम करे,पिसा हुआ लहसुन डाल दे मध्यम आंच पर पकने दे अब कुटी हुई मिर्च और धनिया दाना और हींग डाल दे और थोड़ी देर तक पकाए ।

अब टमाटर डाल दे इसी समय कटा हुआ हरा धनिया  की आधी मात्रा,और कटी हुई मिर्च और अदरक भी कढ़ाई में डाल  दे।

थोड़ा सा पानी डाल  कर पकाए जब तक साइड से मसाला घी न छोड़ने लगे तब तक धीमी आंच पर पकाते रहे।

मसाला भुनने के बाद उबली हुई उरद दाल इसमें मिलाए।

थोड़ी देर तक पकाने के बाद मक्खन डाले इसके साथ ही गरम मसाला,मेथी,नीबू का रस,नमक और बचा हुआ हरा धनिया भी मिला दे ,थोड़ी देर तक करछी से मैश करते हुए और पकाए ।

दाल तैयार है,इसको उसी समय गरम खाएंगे तो ज्यादा अच्छा है नहीं तो इसमें सूखापन सा आ जाता है और ये सख्त हो जाती है।


आओ बनाये बेसन स्प्राउट का चीला


कुछ ऐसा जो जल्दी से बन जाये शरीर को प्रोटीन,फाइबर,आयरन और विटामिन भी मिले,स्वादिष्ट भी हो और सुबह, दोपहर या शाम कभी भी खाया  जा सके  तो ऐसा ही है बेसन से बनने वाला चीला जो बनने  भी उतना ही आसान है और साथ में सेहतमंद भी। आपको बता दे बेसन से केवल पकोड़े ही नहीं बनते,कुछ इस तरह के स्वास्थ्कर चीजें भी बनाई जा सकती है

पहले जानते है बेसन के हमारे शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव

जैसा की हमको पता है,बेसन चना दाल का आटा है और चना प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है, जो शरीर को भरपूर ताकत देता है।  यह एक अत्यधिक पोषक आहार है।

यह बिटामिन थाइमिन का एक अच्छा स्रोत है जो भोजन को शरीर में  ऊर्जा परिवर्तित करने में मदद करता है। 

इसमें विटामिन बी ६ पाया जाता है जो न्यूरोट्रांस्मीटर सेरोटोनिन के संस्लेषण में एक महत्वपूर्ण घटक है जिससे भूख और मूड दोनों ही ठीक रहते है।

बेसन रक्तचाप को ठीक करने में भी सहायक है क्योंकि इसमें स्वाभाविक  रूप से सोडियम की मात्रा काफी होती है। 

हम सभी को मालूम है  कि हमारी हड्डीयो  के लिए कैल्सियम कितना जरूरी है पर यह तब ही काम करता है जब इसको फास्फोरस का साथ मिलता है जो बेसन में मौजूद है।

बेसन के आटे  में गेहू के आटे से कम कैलोरी होती है साथ ही यह ग्लूटन रहित होता है जिससे ऐसे लोग जो सेलेक  रोग से ग्रस्त है या ग्लूटेन से एलर्जी है  उनके लिए अच्छा है।

मधुमेह के रोगियों को गेहू के आटे के बजाय बेसन का प्रयोग करना चाहिए क्योकि यह शरीर में ग्लूकोज़ और इंसुलिन दोनों के स्तर  को कम करता है।

बेसन में  फोलेट विटामिन की प्रचुर मात्रा इसको गर्भवती महिलाओ के लिए बहुत उपयोगी बनाती है क्योंकि इसके कारण गर्भ में पल रहे बच्चे की रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क का पूर्णतः विकास होता है।

बेसन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के गुण  भी है, इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व जैसे कि विटामिन बी १, मैग्नीशियम,फास्फोरस,प्रोटीन एवं  एमिनो एसिड का बेहतरीन संतुलन है जो हमारी रक्षा प्रणाली  को मजबूत करता है और हम जल्दी से बीमार नहीं पड़ते।

इसके अलावा यह आंतो की दुर्बलता को दूर करता है जिससे खाना सही से पचता है, 

भूख  नियंत्रित होती है और मोटापे की समस्या भी दूर होती है।

हम इस चीले की रेसिपी में अंकुरित मूंग दाल को चीले के अंदर भरेंगे जिससे यह और भी गुणकारी हो जायेगा।

दालों  में सबसे पौष्टिक दाल मूंग की ही  होती है।

इसमें विटामिन ए,बी,सी,और इ की भरपूर मात्रा होती है। साथ ही पोटैशियम,आयरन, कैल्शियम  भी होता है।

दाल को अंकुरित करने से इसके गुण और अधिक बढ़ जाते है और यह सुपाच्य हो जाती है।

अंकुर एक नया  जीवन है जो वास्तव में हमारे जीवन को भी नया  रखने में सहायक होगा।

इसके उपयोग से शरीर में छुपे टॉक्सिन बहार निकलते है और शरीर विषाक्त होता है, पाचन अच्छा  होता है ,पेट सम्बन्धित समस्या नहीं होती।

अंकुरित मूंग में सोट्रोजन होता है जो शरीर में कोलेजन और इलास्टिन बनाये रखता है जिससे उम्र का शरीर ,चेहरे पर जल्दी असर दिखाई  नहीं देता है।

इसके अलावा मूंग में भी बेसन की तरह विशेषताएँ है वो भी सुपाच्य रूप में।

बेसन और अंकुरित मूंग को मिलाने से यह एक उत्तम संयोजन बनता है।

इन  दोनों दालों का प्रयोग हम अपनी इस रेसिपी में कर रहे है।


बनने की विधि:

सामग्री:-

बेसन                              २ कप 

अंकुरित मूंग दाल             १/२ कप 

दही                                १/२ कप 

हरा धनिया                      १/४ कप

पुदीना पत्ती                     १/४ कप

प्याज़                              १ न  

कुटी मिर्च                        ५ ग्राम 

हल्दी                               ५ ग्राम  

कुटी काली मिर्च                 ३ ग्राम 

हींग                                ३ ग्राम 

जीरा                               ३ ग्राम  

सैंधा नमक                  स्वादानुसार 

सरसो का तेल             ४ से ५ चम्मच

  • धनिया और पुदीना को अच्छी तरह धोकर बारीक़ काट ले,प्याज़ को भी जितना बारीक़ हो काट ले।
  • एक बर्तन में बेसन,दही,धनिया पुदीना,प्याज़,मिर्च,हल्दी, काली मिर्च,हींग, जीरा, नमक इन सभी को  मिला दे।

अब थोड़ा थोड़ा करके पानी इस मिश्रण में  मिलाना है और एक न पतला न गाढ़ा,मध्यम  घोल बनाना है।


  • इसको यदि आधा घंटा रख देंगे तो ज्यादा अच्छा  है नहीं तो तुरंत भी बना सकते है।
  • अब नॉन स्टिक तवा लेना है (यदि नॉन स्टिक तवा न हो तो सामन्य  तवा को भी नॉन स्टिक बना ले कैसे ---सबसे पहले तवा पर थोड़ी ज़्यादा मात्रा में तेल डालें धीरे धीरे गरम करे आंच बंद करे थोड़ा ठंडा होने दे फिर दुबारा गरम करे आँच बंद करे ठंडा होने दे। तेल हटा दे,कपडे से साफ करे  फिर नमक डाल कर  धीमी आंच पर पुनः गरम करे चारो तरफ नामक को घुमा घुमा कर पकाये अब नमक भी हटा दे फिर दुबारा से तेल डाले फिर धीरे धीरे गरम करे अब तेल हटा दे ,नॉन स्टिक तवा तैयार  है और तब तक रहेगा जब तक आप इस पर पानी नहीं लगाते)
  • तवा पर घोल को डाले और चारो तरफ फैला दे जितना पतला हो सके।
  • धीमा धीमा सिकने दे, आंच को कम ज़्यदा अपने हिसाब से कर  सकते है।
  • अब इसमें आधी साइड में  स्प्राउट फैला दे और दूसरी साइड उसके ऊपर मोड़ दे, थोड़ी देर बाद पलट दे चीला तैयार है बचे घोल से भी इसी  तरह  बना ले। दही के साथ खाये यदि पुदीना चटनी  हो तो पुदीना पत्ती  न डाले चटनी से ही खाये।

महत्वपूर्ण सुझाव :_आप चाहे तो इस रेसिपी में सरसो के तेल की बजाय घुम्मकड़ घी का प्रयोग कर  सकते है तो हींग,जीरा, काली मिर्च डालने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी और स्वाद तो गजब मिलेगा ही।


कैसे बनाये घुमक्कड़ घी


जब भी हम किसी यात्रा पर जाना चाहते है तो सबसे पहला सवाल होता है,क्या साथ ले क्या छोड़े क्योंकि ज्यादा सामान ज़्यादा परेशानी।

कई बार हमने देखा है की हम अपने साथ ज़्यादा सामान ले जाते है विशेषकर कपडे  और बाद मे वे बिना पहने ही वापिस भी आ जाते है,शुरुआत में मेरे  साथ भी ऐसा कई बार हुआ है,शायद आपके भी, है ना ???

यहाँ पर  प्रयास किया गया है उन महानुभावो के लिए जो यात्रा पर अपना खाना खुद ही बनाना पसंद करते है ठीक मेरी तरह,अब चाहे भले ही आशिंकरूप से यानि बनाने वाले को अपने हिसाब से सलाह देकर या अपनी  तरफ से कुछ अलग सामान देकर अपने खाने में  डलवा कर  भागीदार ही क्यों ना  बनाना पड़े।

हम जब भी कोई व्यंजन बनाते है तो सबसे पहले तेल या घी डालते है फिर आगे का कार्यक्रम।  यहां पर हम तेल को छोड़ देते है क्योंकि जितना घी हमारे लिए अच्छा है, रिफाइंड तेल उतना ही हानिकारक है।

सरसो या तिल का तेल खाने के लिए उपयुक्त है परन्तु कुछ विशेष व्यंजन इनसे अच्छे बनते है जैसे सुखी सब्ज़ियों में  सरसो का तेल प्रयोग करने से उनका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है ठीक  इसी  तरह तिल के तेल से मीठे पकवानो का। 

सरसो या तिल के तेल के बारे में  फिर कभी चर्चा करेंगे,अभी जान लेते है घी और उसके हमारे शरीर पर पड़ने वाले अच्छे प्रभाव—-

कहते है  “घी उधार  लेना पड़े तो भी खाओ” इसी  एक वाक्य में इसका सार छुपा है कि यह हमारी सेहत के लिए कितना अच्छा है। 

वाँग्बट्ट ऋषि ने अपने लिखे अष्टांगह्रदय ग्रन्थ में भी ‘घी को  विश्व की सर्वश्रेष्ठ दवा बताया है’। उन्होंने लिखा है आप किसी भी बीमारी से परेशान हो या  जीवन की किसी भी अवस्था में हो घी आपकी समस्या का समाधान करेगा ही।

आप चाहे मोटापे से परेशान ही क्यों न हो,शायद ये बात विचित्र लगे पर सत्य ही है आप घी खाकर पतले रह सकते है जरूरत है सही समझ और उचित  मात्रा को जानने की।  इसमें अच्छा कोलेस्ट्रॉल होता है।

इसके अलावा ओमेगा ३ होने के कारण यह दिमाग के लिए भी ज़बरदस्त टॉनिक है,क्योंकि हमारा दिमाग चिकनी चीजों से बना है।  (शायद इसीलिए यह चिकनी चुपड़ी बातो में आ जाता है )

  • जिन लोगो का पाचन ठीक नहीं रहता उनके लिए घी बहुत अच्छा है,यह पेट को शीतलता देकर शांत रखता है और सौ रोगो की एक जड़ ‘कब्ज़’ को मिटाता है।
  • बच्चो को यदि दूध की बजाय घी का ठीक मात्रा में सेवन करवाया जाये तो यह  उनके विकास के लिए बहुत ही अच्छा साबित होता है, उनकी बुद्धि तेज़ होती है।
  • घी खाने से शरीर की त्वचा कोमल होती है,चेहरे पर चमक आती है।
  • घी के सेवन से आवाज मधुर होती है।
  • वात और पित्त से होने वाली १६० बीमारियाँ घी के सेवन से ठीक हो जाती है।
  • खाने को शुद्ध बनाने में भी घी अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य करता है,क्योंकि हम जानते है की फसल की ज्यादा  पैदावार लेने के लिए बहुत सारे कीटनाशको का प्रयोग किया जाता है जिससे यह अनाज  विषैले हो जाते  है, इसके अलावा सौंदर्य उत्पादकों में भी काफी रसायन होते है जो शरीर में प्रवेश कर जाते है,घी इन सभी प्रकार के विषों का नाश करता है। 
  • महिलाओ के सभी रोगो विशेषकर गुप्त रोगो में घी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 
  • भारत में गर्भावस्ता और बच्चे के जन्म के बाद घी का अधिक  मात्रा में सेवन करने का प्रचलन रहा है अब चाहे वो लड्डू बनाकर हो या ‘पात’ बनाकर ही किया जाये।अभी तो भारत {बॉलीवुड} की कई नायिकाओ ने अपने बच्चे के जन्म के बाद घी क सेवन करने से होने वाले लाभों को बताया  है।
  • महिलाओ को जीवन में तीन प्रमुख अवस्थाओं से होकर गुजरना पड़ता है जिनमे मासिक का शुरू होना,गर्भावस्था और रजोवृत्ति इन  सभी अवस्थाओं के समय यदि घी की  मात्रा सही रूप में ली जाए तो यह स्त्री जीवन के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।
  • स्वभावतः स्त्रिया ज्यादा सोचती है,चिंता करती है और आयुर्वेद में बताया गया है की घी के सेवन से मानसिक शांति मिलती है और मन प्रसन्न रहता है,स्त्रिया अब समझ ही गयी होंगी क्या करना है…. 
  • घी जवानी बनाये रखने में  भी सहायक है जब हमारे शरीर  के सभी अंगों में तैलीयता बनी  रहेगी तो स्वाभाविक  ही है सभी अंग अपना कार्य ढंग से करेंगे जिसके फलस्वरूप हम अधिक समय तक जवान रह सकेंगे। 
  • आयुर्वेद के अनुसार घी जितना पुराना होगा वो शरीर के लिए उतना ही अच्छा होगा। ऐसे लोग जो मद्यपान  से मुक्ति चाहते है उनको पुराने घी का प्रयोग करना लाभकारी होगा  पर साथ में  अपनी इच्छा शक्ति को  भी सुद्रढ़  करना चाहिए। 
  • ऐसा बुखार जो १५ दिन या उससे पुराना हो उसको दूर करने में भी घी, विषेशकर पुराना घी सक्षम है। 
  • आजकल जीवन  की आपाधापी में अवसाद (डिप्रेशन)काफी बढ़ता जा रहा है यहां तक की सभी प्रकार से संपन्न लोग भी ऐसी अवस्था से गुज़र रहे है,घी अवसाद को मिटाने  में काफी सहायता करता है क्योंकि इससे मस्तिष्क में अच्छे एन्ज़ाइम का निर्माण होता है जिससे मन स्वतः ही प्रसन्न रहता है। 
  • आर्युर्वेद के अनुसार बनाया गया आयुर्वेदिक घी, सामान्य घी से १०० गुना तक अधिक हितकर  होता है परन्तु इसकी बनाने की प्रक्रिया लंबी हो जाती है,इसके बारे में  हम अन्य पोस्ट में  बात करेंगे अभी बात करते है जल्दी से तैयार होने वाले घी यानि घुम्मकड़ घी की। 
  • आप सोचेंगे की घी कैसे घुमक्कड़ हो सकता है,क्योंकि यह यात्रा में  हमारे साथ रहकर समय की बचत करेगा खाने को जल्दी बनाने में तथा खाने का स्वाद और पोषण भी बढ़ायेगा। 
  • आप इसको घर में भी  प्रयोग कर  सकते है और खाने का और ज़्यादा ज़ायका बड़ा सकते है। 


बनाने की विधि

सामग्री:

गाय का घी              ५०० ग्राम 

लौंग                        २ न   

साबुत जीरा              ३० ग्राम 

पीसी काली मिर्च         १० ग्राम 

हींग                        १० ग्राम 

करीपत्ता                 १०- १२ पत्तिया 

सैंधा नमक               ७ ग्राम      

  • सबसे पहले कढ़ाई में १०० ग्राम घी गरम करे,जब गरम हो जाये तो जीरा और लौंग डाल दे।
  • अब आंच कम कर दे,करीपत्ता और हींग डाल  दें,थोड़ी देर चलाये  फिर जब करीपत्ता करारे हो जाये तो सैंधा नमक और काली मिर्च डाल  दें।
  • आंच बंद कर के बचा हुआ घी भी मिला दे थोड़ा चला कर घी वाले डिब्बे में बंद कर के रख ले। 

घुमक्कड़ घी तैयार है,यात्रा पर साथ ले जाए, सब्ज़ी बनाने का बहुत समय बचेगा,इसके अलावा खाना खाते  समय उस पर ऊपर से भी डाल कर भी  खा सकते है जैसे खिचड़ी,दलिया,दाल या अन्य आपकी पसंदीदा सब्ज़ी में,यहाँ  तक की मेग्गी में भी डाल कर खा सकते है,अनोखा स्वाद मिलेगा।


OlderStories Home